11। सुबह का आश्चर्य

लिली का नज़रिया

रात धीरे‑धीरे, ठहर‑ठहर कर खुलती चली गई, और मिस्टर वॉर्ड को मुझे अपनी बाँहों से छोड़ने की कोई जल्दी नहीं थी। वो हर एक पल को जी‑भर कर महसूस कर रहे थे—मुझे छूते हुए, मुझे अपना बनाते हुए—ऐसी ठहरी हुई तड़प के साथ जो उनके भीतर की गहराई तक को तृप्त कर रही थी। मेरी टाँगें उनके जाँघों के चार...

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